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आख़िर मै कामयाब हुआ

एक कहानी बताता हु ये करीब ३ साल पुरानी है मेरे घर के पीछे वाली गली
में वो रहती थी उसका नाम मीनू था मैंने वैसे कभी उस पर ध्यान नही दिया था
मेरे एक दोस्त ने बताया की वो उसे पटा चुका है
उसके ये बताने के बाद पहली बार मेरा ध्यान उस लड़की पर गया यकीं मनो वो वाकई
कयामत थी मेरा मुड़ बस अब किसी तरह उसको पटाने का था उसकी उम्र करीब १७-१८ की
होगी उसका फिगर मस्त भरा हुआ था मैंने उससे धीरे-२ मेल-जोल बढ़ाना शुरू किया
लेकिन शुरुवात में मुजहे कोई रेस्पोंस नही मिला अब मई ये मन चुका था की वो
मुघसे नही पटेगी

ये बात मैंने अपने दोस्त को बताई उसने कहा की तू फालतू की मेहनत कर रहा है
अगर दम हा तो एक दिन अकेले पाकर डैरेक्ट प्रपोस मर देना वो मन नही करेगी उसने
मुजहे बताया की उसको पहले भी कई लोग पटा चुके है मेरे दोस्त ने भी उसके साथ
सेक्स किया था लेकिन कभी पुरा सफल नही हो पाया ३-४ बार ऊपर तक ही रहा
अब मुघ्मे काफी हिम्मत आ चुकी थी मैंने एक दिन मौका पाकर उस से बात की मैंने
उसे प्रपोसे कर दिया लेकिन वो बिना कोई उत्तर दिए जाने लगी मैंने उसका हाथ
पकड लिया मैंने उस से फ़िर पुचा लेकिन उसने बादमे उत्तर दूंगी बोलो मई संघ
चुका था की मेरा दोस्त सही है ये आराम से पट जायेगी कुछ दिन बाद वो मुजहे
रस्ते में मिली मैंने उस से फ़िर पूछा उसका जवाब हा था मई बहुत कुश था क्योकि
अब उसके सात सेक्स करने का सपना पुरा होने वाला था हमारे मिलने का दौर शुरू
हो चुका था लेकिन कामयाबी हाथ नही लगी थी कोई रूम या घर ही खली नही मिल रहा
था मेरा घर में भी हमेशा कोई न कोई रहता था कुछ दिन बाद मेरे बगल में हमारा
न्य घर बन न शुरू हुआ ५-६ महीने बाद जब घर लगभग बन चुका था मैंने उसर सुबह ५
बजे वह बुलाया वो ले देकर तैय्यार हो गयी मई सुबह का इंतजार करने लगा सुबह
५:१५ को वो आई मैनेउसे नए घर में ले गया
कुछ देर बात करनेके बाद मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पे रखा पहली बार ये अनुभव
था मेरे लिए था उसने अपनी आँख बंद कर ली मेरा लौड़ा एकदम खड़ा हो गया मैंने
उसके बूब्स को दबाना शुरू किया मैंने अब अपने होठ उसके होठ पर रख दिए क्या
गर्मी थी उसके जिस्म में धीरे-२ मैंने उसके सलवार को उअप्र किया व् उअसके
नाभि को चूमने लगा वो अब मस्त हो चुकी थि उसके मुह से सिसकिया निकल रही थि
जिस से मई और जोश में आ गया था ये सिलसिला करीब १५-२० मिनट तक चला मुजहे लगा
की मेरे घर वाले का उठने का समय हो गया है मैंने उसे जाने को खा मई ये कह तो
रहा था पर मई ही जनता था की मई क्या खो रहा हु एस तरह उअपर से मैंने उसके साथ
५-६बर सेक्स किया लिकिन मई भी अपनी दोस्त कीतरह कामयाब नही हो पाया था कुछ दी
बाद मेरा घर खली हो गया सभी लोग मेरे चाचा के लड़के की शादी में गये थे जन
मुजहे भी था पर मेरे टैक्स अस्सिटेंट का पेपर था मौका अच्छा था मेरे परिवार
वालो कीऐ जाने के बाद मैंने उसे घर बुलाया उसकी सेक्स्की भूख मेरी जितनी बढ़
चुकी थि वो तैयार हीओ गई और दुसरे दिन लगभग ११ बजे वो आई मैंने उसे अन्दर
बुलाया
हम दोनों का किस करने का सिल सिला शुरू हो गया मई उसके बूब्स को दबाने लगा वो
मजा ले रही थि उसके मुह से आह आह की आवाजे आ रही थि मैंने उसके सलवार के
अन्दर हाथ डालकर उअसके ब्रा के हुक खोल दिए और उसे सलवार निकलने को खा कुछ
शर्माने की बदुसने सलवार निकल दिया अब वो मेरे सामने आधी नंगी थि मैंने भी
अपना टी-शर्त उतर दिया मई जिम जाता हु इसलिए मेरी बोडी काफी अच्छी है उसने
मेरा चेस्ट देखा कर कहा कितना चौडा सरीर है तुम्हारा अब मई उसके बूब्स को
पागलो की तरह चूस रहा था वो भी मुजहे किस कर रही थि कभी गले में तो कभी छाती
पर कुछ देर बाद मने उसका नाडा खोल दिया व् उसके चुत के बालो से खेलने लगा वो
पुरी गरम हो चुकी थि मैंने अपनी ऊँगली उसके चुत के अन्दर करने लगा वो
आःह्ह्ह्ह्ह्छ आः की अवजे निकलने लगी अब मैंने अपने लैंड लो पेंट से आजाद कर
दिया
मेरा लैंड अब पुरी उफान में था मैंने अपना लैंड उसकी चुत पर रख कर रगड़ने लगा
वो अब तदपने लगी थि मई उसके बूब्स के साथ खेल रहा था और लगातार उसके गले
बूब्स औए होठ पर किस कर रहा था अब धीरे से मैंने अपना लंड उसके चुत के उंदर
डालना शुरू किया उसे काफी दर्द हो रहा था मेरा भी यह पहला अनुभव था धीरे-२ कर
मैंने अपना लंड ४ इंच अन्दर दल दिया वो चिल्लाने लगी मैंने उसके होठो को कास
कर अपने होठो में दबा लिया और उसके बूब्स को मसलने लगा अब वो रिलेक्स फिल कर
रही थि अब्मैने फ़िर से अन्दर डालना शुरू किया व् एक घटके में अन्दर कर दिया
मुजहे तो जन्नत मिल गया थि वो अब भी दर्द से करा रही थि मैंने अपना लंड
अन्दार्बह्र करना शुरू किया कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी अब कमरा फच
फच की आवाज से गूंज रहा था वो अपने चुतद उठा -२ के मेरा साथ दे रही थि हम
दोनों एसी ओं होने के बावजूद पसीना पसीना होगये थे उसके मुह से
आआआआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़
उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ की अवजे मेरे अन्दर और जोश भर रही थि मेरी र्फ्तात तेज हो
गयी थि २०-२५ मिनट के बाद मै घड गया हम दोनों अब भी एक दुसरे से चिपके हुए थे
कुछ समय बाद हम दोनों बाथरूम, जाकर साथ नहाये व् फी वह सेक्स किया उसके बाद
वो अपने घर चली गई अब ये सिलसिला महीने में ३-४बर तो चलता है
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Night Duty - Desi hot Sex Story in Hindi fonts

मैं आपको अपनी दो साल पहले की आप बीती बता रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं १२ वीं कक्षा में पढ़ रहा था। मेरे पड़ोस वाले घर में एक नया जोड़ा आया था जिनकी शादी को लगभग २ महीने ही हुए थे। जब मैंने उस औरत को देखा तो मेरे होश ही उड़ गए। वो एक परी के जैसी थी, वो बहुत सुंदर थी और गोरी भी थी मानो ऐसी कि अगर छू लो तो मैली हो जाए, और उसके स्तन बहुत मोटे थे जैसे कि फुटबॉल। जब वो चलती थी तो उसकी गांड को देख कर लण्ड कच्छा फाड़ने को हो जाता था। मैंने जिस दिन से उसे देखा, उसी दिन से मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा और उससे बातें करने की कोशिश करने लगा।


जब मैंने उससे थोड़ा मेल जोल बढ़ाया तो मुझे पता लगा कि उसके पति की रात की जॉब है, य़ानि वो रात में अकेली होती है। अब मैं उससे मिलने का बहाना ढूंढने लगा। तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना उससे कुछ मांगने के बहाने मिला जाये।
मुझे अचानक याद आया कि मुझे अपने प्रिंटर की शिकायत करनी है इसके लिए एम टी एन एल फ़ोन से एच पी सर्विस सेण्टर पर फ्री बात होती है और मेरे घर में एम टी एन एल फ़ोन नहीं है। इसलिए मैं फ़ोन के बहाने उसके घर गया और मैंने रात के आठ बजे उसकी दरवाजे की घंटी बजा दी क्योंकि मैंने पता लगा लिया था कि उसका पति शाम ७ बजे घर से निकल जाता है।
घंटी बजाते ही उसने दरवाजा खोला और बोली- अरे आप ? बोलिए कैसे आना हुआ ?
मैंने कहा- आपके घर में एम टी एन एल फ़ोन है?


उसने कहा- है !
मैंने कहा मेरा प्रिंटर ख़राब हो गया है, इसलिए मुझे उसकी शिकायत सर्विस सेण्टर पर करनी है, एम टी एन एल फ़ोन से कॉल मुफ्त है, यदि मैं अपने फ़ोन से कॉल करता हूँ तो बहुत पैसे लगते हैं।
उसने कहा- आप बैठ कर कॉल करो, मैं आपके लिए चाय बना कर लती हूँ।
उस समय वो क्रीम रंग की नाईटी पहने हुई थी जिसमें से उसके स्तन क़यामत ढा रहे थे, जिनको देख कर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी, मेरी कॉल पर बात चल ही रही थी कि वो चाय ले कर आई और उसने चाय सामने पड़ी मेज़ पर रखी तो मुझे उसके स्तनों के दर्शन साफ़ ढंग से हुए, जिनको देख कर मैं बेचैन हो गया और वो सामने पड़े सोफे पर बैठ गई।
उस समय मेरे दिमाग में यह योजना चल रही थी कि कहाँ से बात शुरू करूँ !
जैसे ही मैंने चाय का पहला घूँट पिया वो बोली कि मैं बिस्कुट लाना तो भूल ही गई और वो बिस्कुट लेने के लिए उठी और रसोई की तरफ जाने लगी। तब मैंने उसकी गांड देखी तो मेरा लंड काबू से बाहर हो गया। जब वो रसोई में गई तो मैंने उसका ख्याल लाकर मुठ्ठी मरना शुरू कर दिया। अचानक उसके पैरों की आहट सुन कर मैंने अपना लंड पैंट में डाल लिया, लेकिन लंड पूरे जोश में खड़ा था।
तभी उसने बिस्कुट मेरे सामने रखे तो वो अचानक भांप गई कि मैं कुछ कर रहा था क्योंकि उसकी नज़र ने मेरे लंड को पैंट में खड़ा देख लिया और मैं हांफ भी रहा था। मुझे लगा वो समझ चुकी है कि मैं मुठ मार रहा था क्योंकि उसके चेहरे के भाव ही कुछ ऐसे थे।
तभी मैंने अपने मन को शांत किया और अपने मन को कहा- साले एक दिन में औरत काबू होकर नहीं चुदती, उसके लिए औरत को समय देना जरुरी है।
तो मैंने सोचा कि पहले इससे दोस्ती करनी होगी। तभी मैं बोला- भाभी जी ! आप क्रीम रंग की नाईटी में बहुत अच्छी लग रही हैं !
उसने मुझे इसके लिए धन्यवाद कहा और हम दोनों बातें करने लगे। बात करते करते रात के १० बज गए, तभी मैंने कहा- भाभी जी मुझे अब घर जाना होगा !
भाभी बोली- थोड़ी देर और रुक जाओ ना ! तुम चले जाओगे तो मैं अकेली हो जाऊंगी, प्लीज़ थोडी देर और !
मैंने कहा- भाभी मेरी सुबह परीक्षा है।
भाभी बोली- किस चीज़ की?
मैंने कहा- फिजिकल एजूकेशन की, और मुझे घर जा कर पढ़ना है।
भाभी बोली- मेरे १२ कक्षा में फिजिकल एजूकेशन में ८०% नंबर आए थे, मैं तुम्हें पढ़ा देती हूँ। चलो पूछो- क्या पूछना है? तुम्हारे सारे प्रश्नों का मेरे पास उत्तर है।
मैं खुश हो गया और मैंने प्रश्न किया- लड़कियों की माहवारी कितने दिन बाद आती है?
उसने कहा- २० से ३० दिन के बाद ! और लेट भी हो सकती है, या जल्दी भी आ सकती है।
जैसे ही उसने बताया तो मैं शरमाने लगा !
उसने कहा- शरमाओ मत, पूछो ! जो मन में है !
उसने मेरा होंसला बढाया। तब मैंने पूछा- लड़कियों की चूत पर बाल कितनी उम्र में आते हैं और सम्भोग करते समय लड़कियों के साथ क्या किया जाये कि वो अत्यंत आनंद ले सकें !
भाभी थोड़ी सी हंसी, फ़िर बोली- तुम्हारे प्रश्न तो बड़े टेढ़े हैं पर मैं पीछे नहीं हटने वाली !
मैं समझ गया कि उसके मन में कुछ चल रहा है।
भाभी बोली- चलो, बेडरूम में चल कर पढ़ते हैं।
और हम दोनों बेडरूम में चले गए।उसने कहा- चलो अब बताती हूँ कि लड़कियों की चूत पर बाल कब आते हैं। लड़कियों की चूत पर बाल 12 से 14 साल की उम्र में आते हैं। दूसरी बात- तुमने पूछा था कि लड़कियों के साथ कैसे सम्भोग किया जाए कि वो परम आनन्द ले सकें।
तो इसे समझाने के लिय तो तुम्हें कुछ प्रैक्टीकल करना होगा।
मैं उसका मतलब समझ चुका था।
मैंने कहा- क्या प्रैक्टीकल?
उसने कहा- मुझे यह समझाने के लिए अपना कुछ दिखाना पड़ेगा।
मैंने कहा- दिखा दीजिए।
उसने कहा- डरोगे तो नहीं?
मैंने कहा- मैं कभी नहीं डरता हूँ, मैं पढ़ाई के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।
तभी भाभी ने अपनी नाईटी उतार दी। वो अब एक पारदर्शी चड्डी और ब्रा में थी।
मैंने कहा- यह क्या कर रही हो?
उसने कहा- तुम्हें प्रैक्टिस से पढ़ा रही हूँ।
मेरा लण्ड तन गया था। अब वो मेरे पास आई और उसने मुझसे अपनी कच्छी और ब्रा उतारने को कहा।मैंने वैसा ही किया, उसकी कच्छी और ब्रा उतार दी। उसकी चिकनी चूत देख कर मेरे लौड़े में आग लग गई। अब मैं रुक नहीं पा रहा था। उसने मेरे खड़े लौड़े को पैन्ट में से ही भाम्प लिया।
मैं एकदम डरा हुआ था।
तभी वो बोली- अब क्या हुआ? पहले तो नाईटी में से मेरी गाण्ड देख कर मुट्ठ मार रहे थे। अब लण्ड खड़ा नहीं हो रहा क्या?
मैं चकित रह गया कि उसने मुझे मुट्ठ मारते देख लिया था। तभी उसने मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया और उससे खेलने लगी।
मेरे जोश के सागर में उफ़ान आने लगा। तभी उसने मेरी ज़िप खोल कर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अब मैं भी खुल गया। मैंने उसके स्तन दबाने शुरु कर दिए। वो भी अब जोश में आ गई थी।
तभी उसने मुझे उसकी चूत को चौड़ा करने के लिए कहा।
मैंने चूत के दोनों ओर हाथ लगाया और उसकी चूत को खोल कर चौड़ा कर दिया।
उसने मुझे बताया- अगर मर्द अपने लण्ड की रगड़ औरत की गुठली पर मारता है तो औरत परम आनन्द प्राप्त करती है।
तो मैंने कहा- आप अभी यह आनन्द प्राप्त करना चाह्ती हो?
उसने हंसते हुए कहा- इसके लिए तो इतने पापड़ बेले हैं। चल मादरचोद ! मुझे चोद अब !
अब वो एकदम नंगी होकर बेड पर अपनी टांगें फ़ैला कर लेट गई और कहने लगी- आ जा ! चोद दे मुझे ! चोद डाल !
ऐसा कहते हुए वो अपनी चूत की गुठली को अपन्ने हाथ से रगड़ रही थी।
वो एक बार फ़िर से बोली- चोद दो मुझे !
मैंने इतनी चिकनी चूत पहली बार देखी थी और यह मेरा चूत चोदने का पहला मौका था।
मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का दिया, मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
वो चिल्ला पड़ी, बोली- आराम से डाल मादरचोद ! क्या मेरी चूत फ़ाड़ डालेगा !
मैंने मज़ाक में कहा- हाँ !
उसने कहा- तो देर क्यों लगा रहा है? फ़ाड़ दे चोद चोद कर !
अब मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिए।
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मैंने भी। कुछ देर में हम दोनों की सांसें बढ़ने लगी।
उसने कहा- तेज़ तेज़ चोद !
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने तेज़ तेज़ धक्के लगाए।
वो ' हाँ हाँ चोद और चोद ! जोर से चोद दे ! और तेज़ ! तेज़ ! ' कहती हुई झड़ गई।
उसके बाद मैं भी झड़ गया। हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और मैं अपने कपड़े पहन कर अपने घर आ गया।
अब जब भी उसका पति रात की ड्यूटी करता है तो मैं उसके साथ रात की ड्यूटी करता हूँ।
तो आपको कैसी लगी मेरी कहानी !
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आखिर में आंटी ने मजा ले ही लिया hot dirty hindi sex story

जब मैं 18 साल का था, मेरे पिताजी ट्रांसपोर्ट में काम करते थे। उनकी आमदनी बहुत कम थी। तब हमारा खुद का घर भी नहीं था, हम किराये के मकान में रहते थे।
वहाँ पर हमारे पड़ोस में एक अंकल-आंटी रहते थे जो मकान मालिक के चचेरे भाई थे। उनकी एक लड़की थी, क्या बताऊँ आपको, वो इतनी सेक्सी थी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाये। आंटी भी जबरदस्त थी। हमारे उनके सम्बन्ध बहुत ही अच्छे थे। वो हमारे घर हर रोज आया करती थी और माँ के साथ बैठ कर गप्पें लगाती थी। वो जब भी आती थी तो मैं उनके इर्द-गिर्द ही रहता था क्योंकि मैं खेल खेल में मस्ती में ही उनके बोबे दबा लिया करता था जो बहुत ही नर्म थे।

एक दिन की बात है, मेरे घर पर कोई नहीं था। मेरी माँ और पिताजी भाई के साथ किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे। माँ आटी को कहकर गई थी कि मेरा खाना बनाकर घर भिजवा दें।
दोपहर को एक बजे मैं क्लास से घर पंहुचा ही था कि आंटी खाना लेकर आ गई। वो लाल साड़ी पहने हुए थी और सफ़ेद ब्लाऊज़। ब्रा का रंग कला था जो सफ़ेद ब्लाऊज़ में से साफ़ दिख रही थी।

मैं रोज की तरह मस्ती में उनके बोबे दबाने लगा।

वो बोली- तुम खाना खा लो !

मैंने कहा- आप प्यार से खिलाओ !

वो मान गई और प्लेट में खाना निकाल कर मेरे सामने बैठ गई। तभी वो बोली- गर्मी ज्यादा है, पंखा चला दो !

मैंने खड़े होकर पंखा चला दिया और उनके सामने बैठ गया। तभी उनका आँचल पंखे की हवा से उड़ा और उनके दोनों चूचियों के बीच की खाई मुझे साफ दिखने लगी। मेरा लंड खडा होने लगा। वो मुझे खिलाती गई और मेरी नजर उनके वक्ष पर टिक गई।अचानक उनकी नजर मुझ पर पड़ी। वो समझ गई कि मैं क्या देख रहा था पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मेरा लंड पूरा तन गया। अचानक उनकी नजर मेरी पैंट पर पड़ी, वो हंसने लगी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो उन्होंने कुछ बताया नहीं और मेरे लिए पानी लेने चली गई। वो जब पानी लेकर वापस आई तो मैंने पूछा- आप क्यों हंस रही थी?

तो वो बोली- तेरा लंड मेरे बोबे देखकर ही तन गया !

मैं समझ गया कि आंटी को मस्ती करनी है। मैंने आंटी से कहा- क्या मैं आपके बोबे पूरे देख सकता हूँ?

तो वो झट से मान गई और साड़ी उतार दी। मुझसे कहा- बाकी ब्लाऊज़ और ब्रा तू निकाल ले।मैं झट से उनके बोबे दबाने लगा- अआह .......... क्या मुलायम बोबे थे !

मैं तो उनके बोबे जोर-जोर से मसलने लगा। वो भी आहें भरने लगी। फिर मैंने उनका ब्लाऊज़ निकाला। वह क्या लग रही थी काली ब्रा में !

मैंने ब्रा के साथ ही उनके बोबे फिर से दबाना शुरु कर दिया।

वो आह ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ईईईईए ऊऊऊऊ .....जैसी आवाजें निकालने लगी। 5 मिनट के बाद मैंने ब्रा भी निकाल दी और देखा तो वाह ! क्या बोबे थे ! जैसे दूध की डेयरी !

मैं तो प्यासी बिल्ली की तरह उनके बोबे पर दूध पीने टूट पड़ा। मेरा लण्ड काबू के बाहर हो गया था।

अचानक आंटी बोली- बस ! अब मेरी बारी !

मैं समझ नहीं पाया। वो उठी और मेरी पैंट की जिप खोल दी, फिर पैंट ही निकाल दी, मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और मेरा लण्ड देखकर बोली- वाह, क्या लण्ड है ! कम से कम सात इंच का होगा ! और उसे पकड़ कर हिलाने लगी। मुझे अच्छा लगने लगा। अचानक उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक वो मेरे लण्ड को चूसती ही रही। अचानक मुझे लगा कि मैं छोड़ने वाला हूँ तो मैंने आंटी को कहा- छुट रहा है !

वो बोली- छोड़ दे मेरे मुँह में !

और मैं झड़ गया।

वो बोली- क्या मस्त स्वाद है तेरे वीर्य का !

मेरा लण्ड ठंडा पड़ गया पर वो बहुत ही गरम हो चुकी थी। वो बोली- चल एक काम कर ! आज मैं तेरा कुंवारापन दूर करती हूँ।

मैंने पूछा- कैसे ?

तो बोली- तू जानता है कि सुहागरात में क्या होता है ?

मैंने कहा- नहीं !

तो बोली- चल मैं तुझे बताती हूँ !

और उन्होंने अपना चनिया निकाल दिया और पेंटी भी निकाल दी। मैं तो देखता ही रह गया।

वो बोली- अब नीचे मेरी चूत में उंगली डाल !

मैंने वैसा ही किया।

वो चिल्लाने लगी- एक नहीं तीन उंगलियाँ दल कर अंदर-बाहर कर !

मैंने वैसा ही किया।

वो आहें भरने लगी- आह्ह्ह्ह् ........ऊऊ ऊऊऊऊउह्ह्ह्ह् ...........उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्.........चु हूउदूऊ ऊउ..........

मैंने लगभग 15 मिनट तक उंगली-चोदन किया। अचानक उनकी चूत से पानी निकलने लगा। मैं समझ गया कि आंटी झड़ गई हैं। पर मेरा लंड फिर से तन गया था तो मैंने भी आंटी से कहा- आंटी, अब मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो ! वो फिर से तन गया है !

वो बोली- चोदू ! सिर्फ मुँहचोदन ही करेगा या चूत भी चोदेगा ?

मैं झट से तैयार हो गया। मैंने आंटी की टाँगें फ़ैलाई, उनकी चूत पर अपना लण्ड रखा और जोर से धक्का दिया।

आंटी चिल्ला उठी- लौड़े ! धीरे से डाल ! बेनचोद ! 6 महीने के बाद इतना बाद लण्ड चूत में एक ही झटके में डाल रहा है ?

मैं उनके बोबे दबाने लगा, फिर दूसरे धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड आंटी की चूत में डाल दिया।वो चिल्लाने लगी- निकाल बाहर ! फाड़ दी मेरी चूत ! निकाल बाहर !

मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ऊपर पड़ा रहा। जैसे ही मुझे लगा कि वो अब दर्द कम हुआ है तो मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा।

उनको मज़ा आने लगा था, वो भी उछल-उछल कर साथ दे रही थी- आः ह ह्ह्ह्ह ! ऊऽऽऽ फ़्फ़्फ़ ! आऽऽ आऽ ई ईऽऽए चोद ...जोर से ! मज़ा आ गया ! जैसी आवाजें निकाल रही थी।

मैंने अपने झटकों की रफ्तार और तेज़ कर दी। वो भी मजे से चुदवा रही थी। 15 मिनट के बाद मुझे लगा कि मेरा निकल रहा है, तो मैं आंटी से बोला- आंटी मेरा निकलने वाला है !

तो वो बोली- अंदर ही निकाल दे !

और मैं अंदर ही झड़ गया।

उस रोज़ हमने तीन बार चुदाई की और वो अपने घर चली गई। शाम को मेरा खाना लेकर उसकी बेटी आई। वो बड़ी ही सेक्सी थी।
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Pados Wali bhabhi - hindi sex stories

दरअसल मेरी और मेरे सामने वाले घर में रहने वाले लड़के की शादी करीब करीब एक साथ ही हुई थी। मेरी बीवी और वो दोनों नई दुल्हन थी तो दोनों सहेलियाँ बन गई। वो लड़की गज़ब की चीज़ है। मेरी बीवी भी कम खूबसूरत नहीं है मगर उस लड़की की फिगर और आँखें बहुत नशीली हैं। वो काफी आधुनिक घर की है इसलिए हमेशा जींस और टॉप वगैरह पहनती है जिसमें उसकी फिगर शादी के बाद भी बड़ी मादक लगती है। उसको देखते ही मैं अपनी बीवी को भूल जाता हूँ और मन करता है उसको रगड़ दूं !
काफी समय से यह इच्छा थी, मगर मौका ही नहीं मिल रहा था।
एक बार मेरी बीवी अपने मायके गई थी और मेरे माँ-बाप भी शहर से बाहर गए थे। मैं रात की नौकरी करता हूँ इसलिए सुबह घर पर आता हूँ। जिस वक्त मैं घर आ रहा था उस वक्त शिल्पा अपने पति से बाय-बाय कर रही थी क्योंकि वो अपनी दुकान जा रहा था। मुझे देख के उसने प्यारी सी मुस्कराहट दी और मैंने भी वापस मुस्कुरा दिया और उसके पति से हाथ मिलाया। फिर वो अपनी गाड़ी में दुकान चला गया और मैं भी अपने फ्लैट की तरफ मुड़ा।
तभी पीछे से आवाज़ आई- भैया !
मैंने पीछे घूम के देखा तो शिल्पा मुझे पुकार रही थी। मैंने कहा- हाँ भाभी ?
उसने कहा- मेरे कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई है और मैंने एक जरूरी इमेल करनी है। क्या मैं आपका लैपटॉप प्रयोग कर सकती हूँ?
मैंने कहा- हाँ हाँ ! क्यों नहीं !
और वो मेरे पीछे पीछे मेरे घर चली आई।मेरा लैपटॉप मेरे बेडरूम में था तो हम सीधा बेडरूम में चले आये। मेरी पत्नी घर पर नहीं थी इसलिए कमरा थोड़ा फैला हुआ था। शराब को बोतल ऐसे ही पड़ी थी और मेरे लैपटॉप पर कुछ अश्लील वेब साइट्स खुली हुई थी।
मैंने कहा- भाभी, आप बैठिये, मैं लैपटॉप देता हूँ !
मैंने ऐसे ही लैपटॉप पकड़ा दिया। जैसे ही उन्होंने लैपटॉप देखा तो शिल्पा का चेहरा लाल हो गया, उसने झिझकते हुए कहा- भैया, आप ही वेब साईट खोल कर दीजिये।
मैंने लैपटॉप लिया तो देखा कि नंगी वेब साइट्स खुली हुई थी। मैं घबरा गया और बोला- सॉरी भाभी, यह लीजिये ! अब सब ठीक है !
शिल्पा बोली- भाभी नहीं है तो खूब ऐश हो रही है?
मैंने कहा- मन तो बहुत करता है मगर कुछ भी नहीं कर पाता, सिर्फ इन्टरनेट का ही सहारा है !
उसने कहा- क्या आप मुझे इन वेब साइट्स के लिंक लिख कर दे सकते हैं?
मैं हैरान रह गया ! मैंने कहा- क्या भाभी ?
वो बोली- हाँ ! वो असल में मनीष को दिखानी हैं, शायद ये देख कर वो थोड़ा रोमांटिक हो जायें !
मैंने पूछा- क्यों ? क्या वो अभी रोमांटिक नहीं है?
तो शिल्पा बोली- रोमांटिक का र भी नहीं आता उनको ! बाद रात को आएगा दुकान से, दो पेग पिएगा और मेरे हाथों में अपने छोटे से लंड को देकर कहेगा- हिला दो !
मैं उसे झरवा देती हूँ और फिर वो सो जाता है। मेरे अरमान और बदन की गर्मी वहीं की वहीं रह जाती है। मैंने कई बार कोशिश की, मगर वो समझता ही नहीं ! कहता है कि बहुत थक गया हूँ।
शादी से लेकर आज तक बस आठ या दस बार ही हमने सेक्स किया है जिसमें वो पूरा अन्दर तक भी नहीं जा सका।
वो बोली- भैया, ये मेरी बहुत व्यक्तिगत बातें हैं, किसी को नहीं बताना !
मैंने कहा- आप चिंता मत करो !
मैं समझ गया था कि लोहा गर्म है, हथौड़ा मारने की देर है।
फिर वो बोली- मेरा काम हो गया है, मैं चलती हूँ।
पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने कहा- बस एक चीज दिखानी है आपको !
और कह के अपनी जींस नीचे कर दी। मेरा आठ इंच का लंड खड़ा हुआ फुफकार रहा था। वो पलटी और उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, पसीना उसके गाल से बहने लगा और चेहरा लाल हो गया। वो मेरे पास आई, मेरी आँखों में गुस्से से देखा और मुझे जोरदार थप्पड़ मार दिया। मैं बहुत घबरा गया, शायद मैंने उसकी बातों से गलत समझ लिया था कि वो मेरे साथ अपनी प्यास बुझा लेगी। मुझे लगा कि अब मेरी बदनामी कर देगी ये !
मगर वो बोली- दो साल से मैं आपके घर आ रही हूँ, मगर आज पहली बार बेडरूम तक आई हूँ फिर भी तुमने इतनी देर लगा दी इस चीज़ को दिखाने में ??
मेरी सांस में सांस आई और जान में जान, गिरता हुआ लंड फिर से तन गया और शिल्पा को मैंने बिना कुछ और सोचे समझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरे बदन की जैसे बरसों की प्यास बुझ रही थी। मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया, अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और जोर जोर से चूसने लगा। मेरा हाथ उसके टॉप में घुसे और उसकी ब्रा का हुक ढूंढने लगे। मैंने बिना देर किये हुक खोला और पपीते जैसे दो मम्मे मेरे हाथों में आ गए।
उसकी साँसें गरम हो गई, मैं बता नहीं सकता कि उसके जिस्म से आग निकल रही थी, वो पागलों की तरह मेरे लंड से खेल रही थी और मुझे चुम्मे दे रही थी। एकदम जवान नई दुल्हन की तरह तड़प रही थी। मैंने उसका टॉप और ब्रा उतार कर फेंक दी और अपनी टी-शर्ट और बनियान भी उतार दिया। मैंने उसको दीवार के साथ खड़ा किया और अपनी छाती से उसके मम्मे दबा दिए, उसके माथे से लेकर छाती तक हज़ारों चुम्मियाँ ली और कई जगह तो लाल निशान भी बना दिए।
वो भी भूखी शेरनी की तरह मेरे बदन से खेल रही थी और मेरे होंठों को, गालों को, और छाती को चाट रही थी। उसके मुँह से बस आऽऽह…ऽऽ आऽऽऽऽ ऊऽऽऽ … म्म्मऽऽऽ आऽऽऽ लव यू जान, मेरे असली मर्द....म्म्मम्म्म्मम्म......आआआअ.......यही आवाजें निकल रही थी।
मैंने पंद्रह मिनट तक उसके दोनों मम्मे चूसे और वो तब पागल सी हो है थी। मेरे लंड को रबड़ का खिलौना समझ कर खेल रही थी और अपनी चूत पर पायज़ामे के ऊपर से ही रगड़ रही थी। लेकिन मैं भी कम नहीं था, मैंने और भड़काया, उसके हाथों से लंड खींच लिया और उसका सर नीचे की ओर दबाकर इशारा किया कि मुँह में ले !
वो तो जैसे तैयार थी, पूरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, जैसे रेगिस्तान की गर्मी में किसी को पानी मिल जाए !
बीस मिनट बाद मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटाया। मैंने अपनी जीभ से उसकी नाभि चाटी और और उसकी पैंटी को दांतों में लेकर नीचे किया।
वो बोली- क्या बात है आपमें ! कमाल की कला है बिस्तर में औरत के साथ खेलने की ! मैं कबसे इस सपने के साथ जी रही थी, जो आज पूरा होने जा रहा है।
मैंने कहा- मैं भी इसी सपने को आज तक देख रहा था !
अब वो पूरी नंगी थी, चूत बिल्कुल साफ़ और पूरी गीली ! मैंने उसकी टांगें थोड़ा फैलाई और चूत का पानी चाट कर साफ़ किया। वो छटपटाई और मेरे बालों को जोर से खींचा। मैंने उसकी चूत को खोला तो वो पूरी लाल थी, मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और उसका चिल्लाना और तड़पना !
मैं कैसे बताऊँ कि जितनी देर तक चाटा, वो पानी छोड़ती रही जैसे की महीनों से उसने पानी न झारा हो।
तवा पूरा गर्म था, मैंने फटाफट कंडोम निकाला और लंड पर चढ़ा कर उसकी गांड के नीचे तकिया रखा और दोनों हाथों से उसके हाथ पकड़ कर लण्ड चूत पर रख दिया उसकी ! मुझे पता था कि वो बहुत चिल्लाएगी इसलिए अपने होठों से उसके होंठ बंद कर दिए और एक झटके में थोड़ा सा घुस गया। उसकी चूत वाकई काफी कसी हुई थी, लगभग अनचुदी !
अभी लंड आधा ही गया था कि वो दर्द से कराह उठी, अन्दर ही अन्दर चिल्ला रही थी और पैरों को जोर जोर से पटकने लगी। मैंने एक मिनट बाद दोबारा धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। उसने मेरा मुँह अपने मुँह से हटाया और जोर से चिल्लाई- यह क्या किया ? मैं मर गई, उई माँ ! मैं मर गई ! निकालो इसे.............
मैंने बिना कुछ सुने धक्के मारने शुरू किये, धीरे धीरे उसे मज़ा आने लगा और वो मेरी कमर में नाखून मारने लगी। मैंने भी उसे खूब चाटा, करीब पंद्रह मिनट तक उसे चोदने के बाद मैंने अपनी पूरी पिचकारी अन्दर छोड़ दी। तब तक वो 1-2 बार झड़ चुकी थी। वो मेरे शरीर को कस के पकड़े हुए थी और चाट रही थी।
मैं थक कर उसके मम्मों पर गिर गया और वो मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरने लगी। दो मिनट के बाद मैं उठा और अपना लंड उसकी चूत से निकाला, उसने बड़े प्यार से मेरा कंडोम उतारा और उसके अन्दर का सारा वीर्य अपने मम्मों पर उड़ेल कर मल लिया।
वो बोली- यह मेरा प्रसाद है जो मैं अपने जिस्म पे लगा रही हूँ !
मैंने प्यार से उसे खूब सारे और चुम्मे दिए। उसकी चूत से थोड़ा सा खून छलक आया था जो मैंने रुमाल से साफ़ कर दिया। वो बहुत खुश थी, इस चुदाई के बाद जैसे उसका मन और बदन का हर अंग खिल उठ था। वो इतनी खुश थी कि उसकी आँखों से आंसू छलकने लगे और वो मुझसे काफ़ी देर तक चिपकी रही जैसे मन ही मन वो चाह रही हो कि काश मैं उसका पति होता !
मेरी भी तमन्ना पूरी हो गई थी। वो मेरे बाथरूम में और कपडे पहन कर चली गई।
"ये पल मैं कभी नहीं भूल सकती"......बस यही बोली और मेरे लंड को चूम कर चली गई।
अग्ले दिन वो मुझे मार्केट में मिली और बोली- क्या मेरी याद नहीं आई?
मैंने कहा- क्या कह रही हो, याद तो हर पल आती है !
वो बोली- मैं कल अपने मायके जा रही हूँ !
और वहाँ का फ़ोन नंबर देकर बोली- शाम को फ़ोन करना !
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